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सरस्वती शोध अभियान

सरस्वती शोध की प्रगति

मैदानी अभियानों और वैज्ञानिक विश्लेषण से सरस्वती नदी के प्राचीन मार्ग के महत्वपूर्ण संकेत मिले।

अभियान ने हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान और गुजरात में लगभग 4000 किलोमीटर की यात्रा की।

यात्रा 19 नवंबर 1985 को दिल्ली से शुरू हुई और विभिन्न ऐतिहासिक क्षेत्रों से होकर गुजरी।

शोधकर्ताओं ने दो मैटाडोर वाहनों से यात्रा कर भू-आकृतिक अध्ययन और पुरातात्विक स्थलों की पहचान की।

Simplified palaeochannel map of Saraswati River

लैंडसैट अवलोकन

उपग्रह चित्रों में राजस्थान और पंजाब में प्राचीन नदी मार्ग दिखाई दिए।

घग्गर नदी का विस्तार 6–8 किमी तक पाया गया जो एक विशाल नदी का संकेत है।

Y-2 क्षेत्र प्राचीन चोतांग नदी का सूखा मार्ग दर्शाता है।

भूवैज्ञानिक अवलोकन

सतलुज नदी पहले सरस्वती प्रणाली की मुख्य धारा थी।

भूगर्भीय परिवर्तनों से सतलुज पश्चिम की ओर मुड़ गई।

ब्यास नदी ने भी अपना मार्ग बदला जिससे प्रवाह कम हुआ।

प्रमाण बताते हैं कि सरस्वती नदी सिंधु के समानांतर बहती थी और अंततः अरब सागर में गिरती थी।

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