वाकणकर फाउंडेशन
वाकणकर संग्रहालय
वाकणकर संग्रहालय एक निजी संग्रहालय है जिसमें डॉ. विष्णु श्रीधर वाकणकर के महत्वपूर्ण और अद्वितीय संग्रह संरक्षित हैं, जो प्रसिद्ध पुरातत्वविद् तथा भीमबेटका शैलाश्रयों के खोजकर्ता थे। इस संग्रहालय में द्वितीय शताब्दी ईसा पूर्व से लेकर आधुनिक काल तक के विविध पुरावशेष प्रदर्शित हैं, जो भारत की समृद्ध पुरातात्विक एवं सांस्कृतिक विरासत को दर्शाते हैं।
उनके कई महत्वपूर्ण संग्रह उनके ही शिक्षण संस्थान विक्रम विश्वविद्यालय, उज्जैन स्थित विक्रम कीर्ति मंदिर संग्रहालय में भी संरक्षित हैं।
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प्राचीन पुरावशेष
द्वितीय शताब्दी ईसा पूर्व से 18वीं शताब्दी ईस्वी तक की मूर्तियाँ, टेराकोटा एवं धातु वस्तुएँ।
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दुर्लभ ऐतिहासिक वस्तुएँ
जीवाश्म, शुतुरमुर्ग का अंडा, पांडुलिपियाँ, जनजातीय आभूषण एवं वैज्ञानिक सामग्री।
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प्राचीन सिक्के
क्षत्रप, सातवाहन, गुप्त से लेकर मुगल एवं विदेशी राजवंशों तक के सिक्के।
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चित्र एवं स्केच
शैलचित्रों की प्रतिकृतियाँ, वाकणकर के चित्र तथा अन्य कलात्मक संग्रह।
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शिलालेख
प्राचीन पत्थर शिलालेखों की प्रतियाँ, जो अभिलेखीय अध्ययन हेतु संरक्षित हैं।

पुरावशेष संग्रह
इस संग्रहालय में प्राचीन पुरावशेषों का एक दुर्लभ संग्रह सुरक्षित है, जिन्हें डॉ. वी. एस. वाकणकर द्वारा विभिन्न पुरातात्विक अन्वेषणों एवं उत्खननों के दौरान खोजा गया था।
इनमें मूर्तियाँ, मिट्टी के बर्तन के टुकड़े, टेराकोटा सामग्री एवं धातु वस्तुएँ शामिल हैं, जो मध्यकालीन भारत की कला एवं सांस्कृतिक परंपराओं का प्रतिनिधित्व करती हैं।
कई प्राचीन शिलालेखों के साँचे एवं प्रतिलिपियाँ भी यहाँ शोध एवं शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए संरक्षित हैं।
इस संग्रह में वैज्ञानिक दृष्टि से महत्वपूर्ण वस्तुएँ भी शामिल हैं, जैसे डायनासोर के जीवाश्म अवशेष, भीमबेटका से प्राप्त मानव कंकाल, शुतुरमुर्ग के अंडे, सूक्ष्म पाषाण उपकरण एवं प्रारंभिक मानव से संबंधित अवशेष, जो इसे ऐतिहासिक एवं वैज्ञानिक दोनों दृष्टियों से अत्यंत महत्वपूर्ण बनाते हैं।
संग्रह एवं गैलरी
वाकणकर संग्रहालय में विविध प्रकार की पुरातात्विक, वैज्ञानिक एवं सांस्कृतिक सामग्री संरक्षित है, जो डॉ. वी. एस. वाकणकर के जीवन कार्य एवं भारतीय विरासत में उनके योगदान को दर्शाती है।
पुरातात्विक एवं वैज्ञानिक संग्रह
संग्रहालय में प्राचीन हड्डियाँ, खोपड़ियाँ, जीवाश्म, शुतुरमुर्ग के अंडे एवं भीमबेटका से प्राप्त मानव अवशेष सुरक्षित हैं। इसके अतिरिक्त डांगवाड़ा एवं कायथा उत्खननों के अभिलेख, शिलालेख सामग्री, साँचे एवं वैज्ञानिक दस्तावेज भी संरक्षित हैं।
सिक्का संग्रह
यहाँ 5000 से अधिक प्राचीन सिक्कों का विशाल संग्रह है, जिसमें क्षत्रप, सातवाहन, गुप्त, नाग, चोल जैसे राजवंशों के साथ-साथ मोहम्मद तुगलक जैसे इस्लामी शासकों एवं विदेशी सिक्के भी शामिल हैं।
चित्र एवं दृश्य अभिलेख
संग्रहालय में 5000 से अधिक चित्र एवं स्केच सुरक्षित हैं, जिनमें शैलाश्रयों की प्रतिकृतियाँ, डॉ. वाकणकर की मूल कृतियाँ एवं अन्य कलाकारों के योगदान शामिल हैं।
संग्रहालय गैलरी
गैलरियों में वाकणकर के महत्वपूर्ण कार्यों को दर्शाया गया है, जैसे भीमबेटका की खोज, सरस्वती शोध अभियान, डोंगला के खगोल अध्ययन तथा डांगवाड़ा और कायथा के उत्खनन।
विरासत गैलरी
यह गैलरी डॉ. वी. एस. वाकणकर एवं उनके परिवार को समर्पित है, जिसमें भारतीय पुरातत्व, कला एवं सांस्कृतिक अनुसंधान में उनके योगदान को संरक्षित किया गया है।
संग्रहित फोटोग्राफ
पूरी संग्रहित गैलरी देखने के लिए क्षैतिज रूप से स्क्रॉल करें →

कायथा उत्खनन के दौरान प्राप्त मिट्टी के बर्तन

अध्ययन करते हुए डॉ. विष्णु एस. वाकणकर

डॉ. राजेंद्र प्रसाद के साथ डॉ. वाकणकर

मानव जीवाश्मों पर कार्य करती टेक्सास टीम

चंबल घाटी में मानद मार्गदर्शक के रूप में कार्य करते हुए वाकणकर

भीमबेटका उत्खनन का दस्तावेजीकरण

शुतुरमुर्ग का अंडा

पुरावशेष 3

उत्तर पुरापाषाण काल
डॉ. वाकणकर को प्रदान किया गया पद्मश्री सम्मान

मोरारजी देसाई के साथ डॉ. वाकणकर

इंदिरा गांधी के साथ पद्मश्री उपरांत रात्रिभोज
वाकणकर शोध संस्थान में कार्य करती टेक्सास टीम
सूत्र संहिता
पत्थर संग्रह

डॉ. वाकणकर का दस्तावेजीकरण कार्य

प्राचीन सिक्का

पुरावशेष 1

पुरावशेष 2
सम्मान समारोह
शिव-पार्वती की प्रतिमा
प्राचीन प्रतिमा
डॉ. वाकणकर का अंतिम स्केच

श्रीकृष्ण गुरुजी के संग्रह में संरक्षित चित्र
प्राचीन प्रतिमा
पुस्तकालय एवं सभागार
वाकणकर न्यास एक मध्यम आकार के सभागार का संचालन भी करता है, जहाँ व्याख्यान, संगोष्ठियाँ एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।
संग्रहालय का पुस्तकालय एक समृद्ध शोध भंडार है जिसमें 3,432 पुस्तकें, 4,900 जर्नल, 707 पांडुलिपियाँ तथा 4,000 से अधिक फोटोग्राफिक स्लाइड्स संरक्षित हैं, जो पुरातत्व, प्राचीन इतिहास एवं भारतीय संस्कृति से संबंधित हैं।
यह सुविधा व्याख्यान, संगोष्ठियों एवं सांस्कृतिक गतिविधियों के लिए उपयोग में लाई जाती है, जिससे यह एक सक्रिय शिक्षण एवं शोध केंद्र बनता है।
यह संग्रहालय वाकणकर शोध संस्थान का हिस्सा है, जिसकी स्थापना वाकणकर परिवार के पूर्व निवास स्थान, उज्जैन में की गई थी। इसकी आधारशिला 1988 में रखी गई तथा 1991 में इसका उद्घाटन हुआ। आज यह बहुमंजिला परिसर संग्रहालय, सीता कला दीर्घा, भारतीय कला भवन एवं शोध पुस्तकालय को समाहित करता है।

भारत की सांस्कृतिक धरोहर का संरक्षण
वाकणकर संग्रहालय भारत की समृद्ध पुरातात्विक एवं सांस्कृतिक विरासत में रुचि रखने वाले शोधकर्ताओं, विद्यार्थियों एवं आगंतुकों को निरंतर प्रेरित करता है।
