
वाकणकर भारती संस्कृति अन्वेषण न्यास
उज्जैन
पद्म श्री डॉ. विष्णु श्रीधर वाकणकर की विरासत को आगे बढ़ाते हुए, पुरातात्विक अनुसंधान और भारत की प्राचीन सांस्कृतिक धरोहर का संरक्षण।
700+
शैलाश्रयों का दस्तावेजीकरण
50+
वर्षों का शोध
500+
शैलचित्रों का अध्ययन
1
यूनेस्को विश्व धरोहर खोज
संस्थान के बारे में
भारत की प्राचीन विरासत का संरक्षण
वाकणकर भारती संस्कृति अन्वेषण न्यास की स्थापना डॉ. वाकणकर के कार्य को आगे बढ़ाने के लिए की गई।
उज्जैन में स्थित यह संस्था भारत की प्रागैतिहासिक शैलचित्र कला, लुप्त सरस्वती नदी तथा पूरे उपमहाद्वीप में किए जा रहे पुरातात्विक उत्खननों पर व्यापक अनुसंधान करती है।

हमारा कार्य
अनुसंधान योगदान

शैलचित्र अनुसंधान
भारत की प्राचीन गुफाओं और आश्रयों में पाए जाने वाले प्रागैतिहासिक शैलचित्रों का प्रलेखन और विश्लेषण...
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सरस्वती नदी अध्ययन
भूवैज्ञानिक और पुरातात्विक प्रमाणों के माध्यम से प्राचीन वैदिक सरस्वती नदी के प्रवाह का अनुसंधान...
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डोंगला मेरिडियन संरेखण
डॉ. विष्णु श्रीधर वाकणकर द्वारा खोजे गए प्राचीन खगोलीय संरेखण का अध्ययन...
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पुरातात्विक उत्खनन
भारत की प्रागैतिहासिक सांस्कृतिक विरासत को उजागर करने वाले उत्खनन और खोज...
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वाकणकर अकादमिक परिषद
वाकणकर अकादमिक परिषद के अंतर्गत आगामी परियोजनाएँ और शोध पहलें।
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आगामी
कार्यक्रम
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विचार
नवीनतम ब्लॉग
18/05/2026
Dr.Vishnu Shridhar (Haribhau) Wakankar and Bhojshala Vagdevi Saraswati Mandir, Dhar, Madhya Pradesh, Bharat
After the landmark verdict by Hon’ble Indore High Court on Bhojshala and Vagdevi Saraswati Mandir, a small town called Dhar where we Wakankars hail from is back in limelight. Noted Indologist and archaeologist Padma Shri Dr. Vishnu Shridhar Wakankar tracked down the authentic Bhojshala Saraswati (Vagdevi) idol in London in 1961.
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05/04/2026
The Man Who Found India’s First Art Gallery: Remembering V.S. Wakankar
Dr. V.S. Wakankar didn’t just discover caves; he unearthed a lost chapter of the human story. When he stepped into the silent, painted galleries of Bhimbetka in 1957, he bridged a 30,000-year gap between modern India and its prehistoric ancestors. His life’s work—from tracing the mythical Saraswati River to documenting thousands of rock shelters—transformed the rugged landscape of Central India into the world’s oldest open-air museum
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