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वाकणकर
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खगोलीय धरोहर

डोंगला – मानक समय गणना में महत्व

डोंगला की खोज भारत की प्राचीन खगोलीय ज्ञान और समय मापन परंपराओं की गहराई को दर्शाती है।

वैदिक साहित्य से पता चलता है कि प्राचीन भारत में खगोल विज्ञान और ज्योतिष का अत्यंत विकसित ज्ञान था। उज्जैन नगर इन दोनों विषयों का प्रमुख केंद्र रहा है।

भगवान श्री कृष्ण ने गुरु संदीपनि के आश्रम में खगोल और ज्योतिष का अध्ययन किया था, ऐसा माना जाता है।

उज्जैन का ऐतिहासिक कालियादेह महल पहले सूर्य मंदिर था और आज भी वहां सूर्य की प्रतिमा स्थित है।

आचार्य वराहमिहिर, जो विक्रमादित्य के नौ रत्नों में से एक थे, उज्जैन के पास कायथा से संबंधित थे जहाँ सूर्य मंदिर स्थित था।

लिंग पुराण में उज्जैन को पृथ्वी की नाभि कहा गया है, जो इसके खगोलीय महत्व को दर्शाता है।

आज भी पंचांग निर्माण में समय की गणना का केंद्र उज्जैन ही माना जाता है।

ग्रीष्म अयनांत (Summer Solstice) को समझना

कर्क रेखा उत्तरी गोलार्ध में लगभग 23°27′ अक्षांश पर स्थित एक काल्पनिक रेखा है।

पृथ्वी का झुकाव 22.1° से 24.5° के बीच लगभग 41,000 वर्षों में बदलता रहता है।

21 जून को ग्रीष्म अयनांत के दिन सूर्य की किरणें कर्क रेखा पर सीधी पड़ती हैं।

प्राचीन काल में कर्क रेखा उज्जैन के कर्क राजेश्वर मंदिर से होकर गुजरती थी।

वर्तमान में यह डोंगला गाँव से होकर गुजरती है।

डोंगला बिंदु की खोज

सन 1985 में डॉ. विष्णु श्रीधर वाकणकर ने बिना आधुनिक उपकरणों के डोंगला गाँव में इस महत्वपूर्ण बिंदु की पहचान की।

इस स्थान के निर्देशांक हैं:

  • अक्षांश: 23° 26′ 42.91″ N
  • देशांतर: 75° 45′ 43.31″ E
  • ऊँचाई: 515 मीटर समुद्र तल से
Dongla aerial view

डोंगला का हवाई दृश्य, जहाँ कर्क रेखा का संगम बिंदु स्थित है।

यहाँ ग्रीष्म अयनांत के दिन दोपहर में सूर्य ठीक सिर के ऊपर होता है और कोई छाया नहीं बनती।

Dongla
Samrat Yantra

सम्राट यंत्र

Nadi

नाड़ीवलय यंत्र

Shanku

शंकु यंत्र

समय गणना में डोंगला का महत्व

आज विश्व समय निर्धारण के लिए ग्रीनविच मेरिडियन का उपयोग करता है।

लेकिन ग्रीनविच का कोई विशेष खगोलीय महत्व नहीं है।

डोंगला कर्क रेखा और प्राचीन भारतीय मेरिडियन के संगम पर स्थित है।

प्राचीन खगोलीय यंत्र

यहाँ शंकु यंत्र, भित्ति यंत्र, नाड़ी यंत्र, सम्राट यंत्र और भास्कर यंत्र स्थापित किए गए हैं।

ये यंत्र प्राचीन भारतीय खगोल विज्ञान की उन्नत परंपरा को दर्शाते हैं।

Bhitti

भित्ति यंत्र

Bhaskar

भास्कर यंत्र

GMT के स्थान पर DMT

डॉ. वाकणकर ने सुझाव दिया कि डोंगला को विश्व का प्रधान मेरिडियन माना जाना चाहिए।

उन्होंने डोंगला मेरिडियन टाइम (DMT) को अपनाने का प्रस्ताव रखा।

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