सरस्वती शोध अभियान
अंतिम निष्कर्ष
अभियान के निष्कर्षों से पता चला कि वैदिक सरस्वती नदी हिमालय से निकलकर अरब सागर तक बहने वाली एक प्रमुख नदी प्रणाली थी।

सरस्वती का प्राचीन मार्ग
सरस्वती शोध अभियान के अनुसार यह नदी हिमालय में आदि बद्री के पास उत्पन्न हुई और उत्तर भारत के मैदानों से होकर बहती थी।
यह नदी कुरुक्षेत्र, सिरसा, हांसी, कालीबंगा, अनूपगढ़ और सूरतगढ़ जैसे ऐतिहासिक क्षेत्रों से होकर अंततः कच्छ के रण तक पहुँचती थी।
अभियान के मुख्य निष्कर्ष
- वैदिक सरस्वती नदी हिमालय से मैदानों में लगभग 6–8 किमी चौड़ाई के साथ बहती थी।
- वैदिक साहित्य में वर्णित अनेक बस्तियाँ नदी के किनारे पाए गए पुरातात्विक स्थलों से मेल खाती हैं।
- सिंधु नदी की तुलना में सरस्वती के किनारे अधिक बस्तियाँ मिली हैं।
- गहरी भूगर्भीय परतों में मछलियों और जलीय जीवों के जीवाश्म मिलने से प्राचीन जल स्रोतों का संकेत मिलता है।
- प्लाइस्टोसीन–होलोसीन काल में भूगर्भीय परिवर्तनों के कारण यह नदी धीरे-धीरे सूख गई।
सभ्यता की नई समझ
पुरातात्विक और भूगर्भीय प्रमाणों के आधार पर डॉ. वी. एस. वाकणकर ने प्रस्तावित किया कि तथाकथित सिंधु घाटी सभ्यता को अधिक सटीक रूप से सिंधु–सरस्वती सभ्यता कहा जाना चाहिए।
सरस्वती शोध अभियान का समापन सोमनाथ में हुआ, जो इस महत्वपूर्ण ऐतिहासिक यात्रा का प्रतीक है।
