शैलचित्र अनुसंधान
शैलचित्र मानव अभिव्यक्ति के सबसे प्राचीन रूपों में से एक हैं। ये चित्र और नक्काशियाँ प्रागैतिहासिक जीवन, विश्वासों और सांस्कृतिक परंपराओं का दृश्य रिकॉर्ड प्रस्तुत करती हैं।
डॉ. वी. एस. वाकणकर द्वारा भीमबेटका शैलाश्रयों की खोज ने हजारों वर्षों की सतत सांस्कृतिक परंपरा को उजागर किया और भारत को शैलचित्र अनुसंधान के वैश्विक मानचित्र पर स्थापित किया।

भीमबेटका चित्रित शैलाश्रय
डॉ. वी. एस. वाकणकर द्वारा खोजे गए विश्व के सबसे बड़े प्रागैतिहासिक शैलाश्रयों का समूह।

भीमबेटका के शैलचित्र
प्रागैतिहासिक चित्र जो शिकार, पशु, अनुष्ठान और दैनिक जीवन को दर्शाते हैं।

डॉ. विष्णु श्रीधर वाकणकर द्वारा रेखाचित्र
डॉ. वाकणकर द्वारा भीमबेटका की खोज के दौरान बनाए गए फ़ील्ड रेखाचित्र और दस्तावेज़ीकरण।
