सरस्वती शोध अभियान
लुप्त सरस्वती नदी की खोज
नदियों ने हमेशा सभ्यताओं के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। कई प्राचीन सभ्यताएँ नदियों के किनारे विकसित हुईं, लेकिन आज उनकी नदी प्रणालियाँ लुप्त हो चुकी हैं या बदल गई हैं।
भारतीय सभ्यता को अक्सर सिंधु घाटी सभ्यता कहा जाता है क्योंकि हड़प्पा और मोहनजोदड़ो की खोज सिंधु नदी के किनारे हुई थी।
लेकिन वैदिक साहित्य में एक और महान नदी — सरस्वती का उल्लेख बार-बार मिलता है, जिसे नदीतम अर्थात् सबसे महान नदी कहा गया है।
समय के साथ सरस्वती को काल्पनिक माना जाने लगा क्योंकि यह आज दिखाई नहीं देती।
इन प्रश्नों ने विद्वानों को यह जांचने के लिए प्रेरित किया कि क्या सरस्वती वास्तव में एक ऐतिहासिक नदी थी जिसका मार्ग लुप्त हो गया।

सरस्वती शोध अभियान
विद्वानों और पुरातत्वविदों ने सरस्वती शोध अभियान का गठन किया।
इस अभियान का नेतृत्व डॉ. विष्णु श्रीधर वाकणकर ने किया।
इसका उद्देश्य सरस्वती नदी के किनारे विकसित सभ्यता को समझना था।
