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वाकणकर
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अनुसंधान

पुरातात्त्विक उत्खनन

डॉ. वी. एस. वाकणकर द्वारा किए गए महत्वपूर्ण उत्खननों ने भारत की प्रागैतिहासिक और प्रोटो-ऐतिहासिक संस्कृतियों को समझने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

Major Excavation Sites

भीमबेटका उत्खनन
UNESCO World Heritage Site

भीमबेटका उत्खनन

मध्य प्रदेश, भारत

भीमबेटका में प्रमुख उत्खनन विक्रम विश्वविद्यालय द्वारा डॉ. वी. एस. वाकणकर के मार्गदर्शन में किए गए। बाद में डेक्कन कॉलेज, सागर विश्वविद्यालय और स्विट्ज़रलैंड के शोधकर्ताओं ने भी उत्खनन किया।

कायथा

कायथा

उज्जैन जिला, मध्य प्रदेश

1966 – 1966

डॉ. वी. एस. वाकणकर द्वारा खोजा गया यह स्थल उज्जैन से लगभग 15 मील उत्तर में कालीसिंध नदी के किनारे स्थित है। 1965–66 में उत्खनन किया गया। यहाँ से प्राप्त सामग्री लगभग 4000 से 2400 वर्ष पुरानी है। उत्खनन में सुव्यवस्थित मकान मिले जिनमें रसोई, शौचालय और जल निकासी जैसी सुविधाएँ थीं। साथ ही मालवा मृद्भांड, तांबे के आभूषण, लोहे के उपकरण और टेराकोटा की वस्तुएँ भी प्राप्त हुईं।

डांगवाड़ा

डांगवाड़ा

मध्य प्रदेश, भारत

1978 – 1979

एम. डी. खरे और डॉ. वी. एस. वाकणकर द्वारा खोजा गया यह स्थल उज्जैन से लगभग 32 किमी दक्षिण-पश्चिम में स्थित है। 1978–79 में उत्खनन किया गया। यहाँ से प्राप्त सामग्री 10 विभिन्न सांस्कृतिक कालों से संबंधित है, जो कायथा संस्कृति से लेकर उत्तर-परमार काल तक फैली हुई है। एक विशेष खोज में यज्ञकुंड सहित मकान का चबूतरा मिला, जिसमें आधी जली समिधा, टेराकोटा के दीपक, सूर्यकांत मणि (यज्ञ वेदी जलाने के लिए प्रयुक्त लेंस), आभूषण और मृद्भांड प्राप्त हुए।

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